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Thursday, 30 March 2017

मेरे महकते एहसास तुम

मेरे दिल को छू गये हो तुम,
एहसास मेरा चमन हो गया।

खुशबू बन गये तुम जेहन के,
गुलाब सा तन बदन हो गया।

पंखुड़ियाँ बिखरी हवाओं में,
चाहत फैला गगन हो गया।

ज़माने के शोर से अन्जान हूँ,
खुमारी में डूबा ये मन हो गया।

महकती साँसे कहने लगी है,
तुझसे मोहब्बत सजन हो गया।

न टूटे कभी  नेह का ये बंधन,
दिल से दिल का लगन है गया।

         #श्वेता🍁

  

रिश्ता अन्जाना हो गया

तुमसे बिछड़े तो इक ज़माना हो गया,
जख्म दिल का कुछ   पुराना हो गया।

टीसती है रह रहकर  यादें बेमुरव्वत,
तन्हाई का खंज़र कातिलाना हो गया।

नमी पलकों की पूछती है दरोदिवारों से,
हर आहट से क्यूँ रिश्ता अन्जाना हो गया।

लहर मोहब्बत की नहीं उठती है दरिया में,
अब साहिल ही समन्दर से बेगाना हो गया।

रोज ही टूटकर बिखरते है फूल सेहरा में,
बहारों का न आना तो इक बहाना हो गया।
 
    #श्वेता🍁