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Friday, 31 March 2017

स्मृतियों का ताजमहल


समेटकर नयी पुरानी
नन्ही नन्हीं ख्वाहिशें,
कोमल अनछुए भाव
पाक मासूम एहसास,
कपट के चुभते काँटे
विश्वास के चंद चिथड़़े,
अवहेलना के अगूंज
बेरूखी से रूखे लफ्ज़,
और कुछ रेशमी सतरंगी
तितलियों से उड़ते ख्वाब,
बार बार मन के फूलों
पर बैठने को आतुर,
कोमल नाजुक खुशबू में
लिपटे हसीन लम्हे,
जिसे छूकर महकती है
दिल की बेरंग दिवारे,
जो कुछ भी मिला है
तुम्हारे साथ बिताये,
उन पलों को बाँधकर
वक्त की चादर में लपेट
नम पलकों से छूकर,
दफन कर दिया है
पत्थर के पिटारों में,
और मन के कोरे पन्नों
पर लिखी इबारत को
सजा दिया है भावहीन
खामोश संगमरमर के
स्पंदनविहीन महलों में,
जिसके खाली दीवारों पर
चीखती है उदासियाँ,
चाँदनी रातों में चाँद की
परछाईयों में बिसूरते है
सिसकते हुए जज्बात,
कुछ मौन संवेदनाएँ है
जिसमें तुम होकर भी
कहीं नहीं हो सकते हो,
खामोश वक्त ने बदल दिया
सारी यादों को मज़ार में,
बस कुछ फूल है इबादत के
नम दुआओं में पिरोये
जो हर दिन चढ़ाना नहीं भूलती
स्मृतियों के उस ताजमहल में।

       #श्वेता🍁

जय माँ भवानी

शक्तिरूपा जगतव्यापिनी भगवती नमन है आपको।
तेजोमय स्वधा जगजननी भगवती नमन है आपको।

दिव्य स्वरूप से मोहती मुख तेज रश्मियों का पुंज है
विकराल ज्वाला भस्म करती  नयनों में अग्नि खंज है
मंद मंद मुस्कुराती छवि तेरी विश्वमोहिनी तेरा ओज है
धन्य तेरा पावन दरश, करते भगवती नमन है आपको।

अस्त्रशस्त्र खड्ग खप्पर धारिणी तुम दुष्टों को संहारती
धर के रुप महाकालिका रक्तबीज चण्डमुण्ड विनाशती
सिंह पर सवार दस भुजी माता राक्षसों को ललकारती
हे दानवदलन दुष्टमर्दिनी माता,भगवती नमन है आपको।

किस रूप का वर्णन करूँ किस कथा का स्तवन करूँ
ऊँ कार के आदि से अनन्त तक शब्दों का मोह जाल तू
कण कण में व्यापित माँ भवानी हर जीव में है  प्राण तू
हृदय ज्ञान चक्षु प्रदायिनी, माँ भगवती नमन है आपको।

विश्व में कल्याण करना जन जन के दुख का नाश करना
प्राणियों के हृदय में में प्रेम करूणा दया बन वास करना
रोग शोक जीवन के संग्राम में लड़ने का बल प्रदान करना
निर्मल बना दो मन को, बारंबार भगवती नमन है आपको।

              #श्वेता🍁

नीरवता से जीवन की ओर

अभी अंधेरे की चादर
पसरी है बाहर,
अपने कच्चे पक्के छोटे बडे
घरौंदों मे खुद को समेटे
गरम लिहाफों को लपेटे
सुख की नगरी मे विचरते
जहान के झमेले से दूर
सब सुखद नींद मे है,
मेरे छत के पास
उस पीपल मंे हल्की हल्की
सुगबुगाहटें होने लगी,
रात थकी सी चुपचाप
तन्हा राहगीर सी
उजाले के आस में
अपने विश्राम के इंतज़ार में हो,
आसमां का एक कोना
अब स्याह से रक्तिम होने लगा
चिड़ियों की चीं चीं बढ़ने लगी
दूर मंदिर में घंटियों का
मधुर स्वर रस घोल गया
अंतिम तारा भी खो गया,
समन्दर की नीले लहरों में
रतनारी  बड़ी सी बिदियाँ
नभ के माथे पे उदित हुई,
सरसराती शीतल पवन
हौले से कलियों को चूमने लगी
बूंदें ओस की दूबों पर
बूटों से झिलमिलाने लगे
झुंड पंक्षियों के झूमने लगे,
फुदक फुदक कर.गौरैया
मे नृत्य दिखाने लगी
एक नयी सुबह ने पलकें
अपनी खोली है फिर से
आपके जीवन में नयी आशा
नवजीवन का संचरण करने
बाहों को पसारे मुस्कुराईये
दिल से स्वागत कीजिए
अपने जीवन के एक नये दिन का।

     #श्वेता🍁