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Wednesday, 7 June 2017

पुरानी डायरी

सालों बाद
आज हाथ आये
मेरी पुरानी डायरी के
खोये पन्ने,
फटी डायरी की
खुशबू से खोकर,
छूकर उंगलियों के
पोर से गुजरे वक्त को
जीने लगी उन
साँस लेते यादों को,
मेरी पहली कविता,
जिसके किनारे पर
काढ़ी थी मैंने
लाल स्याही से बेलबूटे,
जाने किन ख्याल़ो में बुनी
आड़ी तिरछी लकीरें
उलझी हुयी अल्पनाएँ
जाने किन मीठी
कल्पनाओं में लिखे गये
नाम के पहले अक्षर,
सखियों की खिलखिलाते
हंसी में मुस्कुराते कार्टून,
मेंहदी के नमूने,
नयी नयी रसोई बनाने
की उत्साह में लिखे गये
संजीव कपूर शो के व्यंजन
कुछ कुछ अस्पष्ट
टेलीफोन के नम्बर
कुछ पन्नों पे धुँधले शब्द
जिस पर गिरे थे
मेरे एहसास के मोती,
अल्हड़,मादक ,यौवन
की सपनीली अगड़ाईयाँ,
बचकाने शब्दों में अभिव्यक्त,
चाँद, फूल,और परियों की
आधी अधूरी कहानियाँ
कुछ सूखे गुलाब की पंखुड़ियाँ
दो रूपये के नये नोट का
अनमोल उपहार,
जिसे कभी माँ ने दिया था
जिसका चटख गुलाबी
अब फीका हो गया था,
दम तोड़ते पीले पन्नों पर
लिखे मेरी भावनाओं
के बेशकीती धरोहर
जिसके सूखे गुलाब
महक रहे है
गीली पलकों पे समेटकर
यादें सहेजकर रख दिया
अपनी गुलाबी दुपट्टे में
लपेटकर,फुरसत के पलों
में फीके पन्नों में
गुजरे वक्त की चमकीली
तस्वीर देखने को।

         #श्वेता🍁